चीनी के दाम ₹ 64 के पार! क्या यह मोदी सरकार की विफलता है या कुछ और? जानिए 2010 में मनमोहन सरकार के समय क्या था हाल
Sugar Import Facts 2026 Comprehensive Review: चीनी की मिठास हुई कड़वी! जानिए क्यों भारत सहित पूरी दुनिया में बढ़ रहे हैं दाम, 10 लाख टन आयात का सच और 2010 की यूपीए सरकार के 40 लाख टन आयात से निष्पक्ष तुलना नई दिल्ली। त्योहारों का सीजन नजदीक आते ही देश भर के खुदरा बाज़ारों में चीनी की कीमतें ₹ 65 प्रति किलोग्राम पर पहुँच गई हैं, जिससे आम उपभोक्ता का मासिक घरेलू बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। मुख्य विपक्षी दल इसे वर्तमान व्यवस्था की प्रशासनिक विफलता और सरकार की ढीली आर्थिक नीतियों का परिणाम बता रहे हैं, लेकिन वास्तविक प्रशासनिक, विधिक और राजस्व आंकड़े यह साफ दर्शाते हैं कि चीनी की कीमतों में यह उछाल केवल भारत की आंतरिक समस्या नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़ा वैश्विक संकट है। इस समय लंदन और न्यूयॉर्क के अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजारों (Commodity Markets) में चीनी के दाम पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड स्तरों को छू रहे हैं, जिसके पीछे अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति, वैश्विक मौसम चक्र और दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देशों के नीतिगत फैसले जिम्मेदार हैं। भारत के संदर्भ में इस संकट की वास्तवि...